Plastering

Plastering in Hindi: 100% सही Thickness & 3-in-1 Free Guide | eLabour
🧱 Construction Knowledge Hub T-06 / 10

Plastering & Finishing
पलस्तर एवं फिनिशिंग

⏱️ 16 min read 🔢 3-in-1 Plaster Calculator ❓ 15 Questions Quiz 📋 IS 1661 | IS 1542 | IS 2402
🧱
लिखा और Review किया गया: B Pandey, Civil Engineer
eLabour Construction Knowledge Team • IS Codes, BOCW Act और Site Practice पर आधारित सामग्री
Last Updated25 जुलाई 2026
📖 Level चुनें
👷 मजदूर Level — Basic Knowledge Basic
1Plastering क्या है?

Plastering, ईंट या ब्लॉक की दीवार और RCC सतह पर सीमेंट-रेत के मिश्रण (Mortar) की एक परत लगाने की प्रक्रिया है। इससे दीवार की सतह चिकनी, सीधी और मजबूत बनती है, और आगे पेंट या पुट्टी लगाने लायक तैयार होती है।

💡 आसान भाषा में
जैसे किसी खुरदरी लकड़ी पर पॉलिश लगाकर उसे चिकना बनाया जाता है — वैसे ही खुरदरी ईंट की दीवार पर Plaster लगाकर उसे चिकना और साफ-सुथरा बनाया जाता है।
2Plaster क्यों ज़रूरी है?

Plaster सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं है — यह दीवार को पानी, नमी और मौसम से बचाता है, ईंट के जोड़ों को छुपाता है, और दीवार की उम्र बढ़ाता है। बिना Plaster की दीवार जल्दी खराब हो जाती है।

3Plastering में कौन से Tools इस्तेमाल होते हैं?
🔧 Trowel
मोर्टार उठाने और दीवार पर लगाने के लिए
सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला मुख्य औज़ार
📏 Straight Edge
सतह को सीधा और level में लाने के लिए
Plaster की मोटाई बराबर रखने में मदद करता है
4Plastering करते समय क्या सावधानी रखें?

काम शुरू करने से पहले दीवार को अच्छी तरह गीला करें ताकि ईंट Plaster का पानी न सोखे। सीमेंट के सीधे संपर्क से हाथों की त्वचा खराब हो सकती है, इसलिए दस्ताने पहनें और आंखों को धूल से बचाएं।

⚠️ ध्यान रखें: सूखी दीवार पर सीधे Plaster लगाने से वह जल्दी सूखकर चटक (crack) सकता है — काम से पहले दीवार की wetting ज़रूर करें।
🔢 Plaster Calculator
3-in-1: Material Qty | Thickness Guide | Curing
Material Required
0.66 सीमेंट बैग
अनुशंसित (Recommended)
12–15 mm
Curing Requirement
7 दिन

Plastering in Hindi: 100% सही Thickness और 3-in-1 Guide

अगर आप Plastering in Hindi सर्च कर रहे हैं, तो यह गाइड आपके लिए है। Plastering (प्लस्तर), ईंट या ब्लॉक की दीवार और RCC सतह पर सीमेंट-रेत के मोर्टार की एक परत लगाने की प्रक्रिया है, जिससे सतह चिकनी, मज़बूत और मौसम-रोधी बनती है। Internal Wall पर आमतौर पर 12-15mm मोटाई और 1:6 अनुपात, जबकि External Wall पर 15-20mm मोटाई और डबल कोट (1:4 Rough + 1:6 Finish) इस्तेमाल होता है।

Material Quantity निकालने के लिए Dry Volume Method इस्तेमाल होता है — Wet Volume (Area × Thickness) में bulking और wastage के लिए 33% जोड़कर Dry Volume निकाला जाता है, फिर mix ratio के अनुसार Cement और Sand की मात्रा calculate होती है।

Curing Plaster की मजबूती के लिए सबसे ज़रूरी step है — Internal Wall के लिए कम से कम 7 दिन और External Wall के लिए 10 दिन तक नियमित पानी देना चाहिए, वरना दीवार में crack आने का खतरा रहता है। इसके लिए IS 1661:1972 Application guidelines देता है, IS 1542:1992 Sand की specification तय करता है, और IS 2402:1963 External Rendered Finishes के लिए Code of Practice है (इन मानकों की अधिक जानकारी Bureau of Indian Standards – BIS पर देखी जा सकती है)।

हमारा Plaster Calculator तीन काम करता है: Area और Thickness के अनुसार Cement Bags और Sand की मात्रा निकालें, Surface Type के अनुसार सही Thickness और Mix Ratio जानें, और Plaster की Curing Requirement calculate करें।

🏗️ किसके लिए जरूरी है? (8 Use Cases)

👷
Plaster Mistri / Worker
सही thickness और mix ratio के साथ काम करें।
🏗️
Civil Contractor
Material quantity और labour सही तरीके से plan करें।
🧰
Foreman / Supervisor
Curing schedule और quality check manage करें।
📐
Site Engineer
Defects diagnose करें और IS Code compliance रखें।
🧮
QS / Estimator
Cement और Sand की quantity accurately निकालें।
💰
Project Owner / Builder
Plaster का budget और material cost समझें।
📚
Civil Students
Plaster types और IS Code theory सीखें।
🔍
Quality/Safety Officer
Cracking, hollowness जैसे defects की जांच करें।

❓ FAQs — Plastering & Finishing

Internal Wall पर आमतौर पर 12-15mm मोटाई का Single Coat (1:6) काफी होता है, जबकि External Wall पर मौसम से बचाव के लिए 15-20mm मोटाई का Double Coat (1:4 Rough + 1:6 Finish) इस्तेमाल होता है।
Dry Volume Method से — Area × Thickness से Wet Volume निकालें, उसमें 33% bulking/wastage जोड़कर Dry Volume निकालें, फिर mix ratio के अनुसार Cement और Sand का हिस्सा calculate करें।
Internal Wall के लिए कम से कम 7 दिन और External Wall के लिए 10 दिन तक दिन में 2-3 बार पानी देना चाहिए।
IS 1542:1992 Plaster में इस्तेमाल होने वाली रेत की grading और quality specification तय करता है।
जल्दी सूखने, कम Curing, गलत mix ratio, या सतह की गलत तैयारी की वजह से Plaster में बारीक दरारें आ जाती हैं।
सूखी ईंट Plaster का पानी जल्दी सोख लेती है, जिससे मोर्टार ठीक से बंध (bond) नहीं पाता और Hollowness या Cracking का खतरा बढ़ जाता है।
RCC सतह (Ceiling/Column) पहले से smooth होती है, इसलिए वहां आमतौर पर 6-10mm मोटाई और 1:4 अनुपात काफी होता है।
रेत में मौजूद unslaked lime के कण बाद में फूलकर सतह पर छोटे उभार या गड्ढे बना देते हैं — इसलिए IS 1542 के अनुसार साफ रेत ही इस्तेमाल करनी चाहिए।
External Wall पर, जहां मौसम और पानी का ज़्यादा असर होता है, पहले Rough Coat और फिर Finishing Coat लगाकर Double Coat Plaster किया जाता है।
IS 2645 के अनुसार Water-Proofing Compound मिलाने से Plaster की नमी झेलने की क्षमता बढ़ती है, खासकर External Wall और Bathroom जैसी जगहों पर उपयोगी है।
❓ Plastering & Finishing Quiz
Question 1 / 5
0
/ 5
बढ़िया!
Quiz पूरी!